लेख अच्छा और सार गर्भित है। अर्थ की अधिकता और न्यूनता दोनों ही मानवता को अंधकार की ओर धकेल देता है। इस लेख में अर्थ से अनर्थ की समस्याओं पर विस्तार से टिप्पणी की गई लेकिन उसका हल क्या है ?? इस प्रश्न पर लेखक मौन है। अब समय समस्या गिनाने का नहीं है बल्कि हल , उपाय बताने का है।इसका अभाव लेख में खटकता है।
Madhusudan maurya
TGT- HINDI
DELHI
Very true, most of us in current society will agree if they think neutrally.
लेख अच्छा और सार गर्भित है। अर्थ की अधिकता और न्यूनता दोनों ही मानवता को अंधकार की ओर धकेल देता है। इस लेख में अर्थ से अनर्थ की समस्याओं पर विस्तार से टिप्पणी की गई लेकिन उसका हल क्या है ?? इस प्रश्न पर लेखक मौन है। अब समय समस्या गिनाने का नहीं है बल्कि हल , उपाय बताने का है।इसका अभाव लेख में खटकता है।
Madhusudan maurya
TGT- HINDI
DELHI